बाल सुरक्षा व संरक्षण की दिशा में प्रतापगढ़ जिले के लिए 2025 रहा उल्लेखनीय वर्ष
47 बच्चों को बाल श्रम से छुड़ाया गया, 14 बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया
वर्ष 2025 के दौरान गायत्री सेवा संस्थान द्वारा जिले में 19 बाल विवाह रुकवाए गए। इसके साथ ही 14 बच्चों को ट्रैफिकिंग एवं बंधुआ मजदूरी जैसी अमानवीय प्रथाओं से मुक्त कराया गया। वहीं 47 बच्चों को बाल श्रम से छुड़ाकर सुरक्षित किया गया। बचाव के बाद 14 बच्चों को पुनः विद्यालयों में दाखिला दिलाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया, जिससे उनके भविष्य को सुरक्षित दिशा मिल सकी।
गायत्री सेवा संस्थान, राजस्थान में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्यरत नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) का सहयोगी संगठन है। जेआरसी के 250 से अधिक सहयोगी संगठन देश के 451 जिलों में सक्रिय रूप से बाल अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं।
जेआरसी नेटवर्क द्वारा 1 जनवरी 2025 से अब तक देशभर में 1,98,628 बाल विवाह रोके गए, साथ ही 55,146 बच्चों को ट्रैफिकिंग से मुक्त कराया गया, जिनमें 40,830 लड़के एवं 14,316 लड़कियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 42,217 ट्रैफिकिंग मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।
इन उपलब्धियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गायत्री सेवा संस्थान, प्रतापगढ़ के जिला समन्वयक श्री रामचन्द्र मेघवाल ने कहा—
“बाल सुरक्षा की दिशा में 2025 प्रतापगढ़ जिले के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन ग्राम पंचायतों, शिक्षकों और समुदाय के सहयोग से बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव संभव हो पाया है। किसी बच्चे को ट्रैफिकिंग या बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराना केवल पहला कदम है, असली चुनौती उनके पुनर्वास, शिक्षा और परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने की है, ताकि वे दोबारा शोषण का शिकार न बनें।”
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन नेटवर्क के सहयोग से गायत्री सेवा संस्थान वर्ष 2030 तक भारत से बाल विवाह, बाल श्रम, बाल तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी के उन्मूलन के लक्ष्य को लेकर निरंतर कार्य कर रहा है। यह नेटवर्क रेलवे सुरक्षा बल (RPF) सहित सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय में काम करता है।
बाल विवाह की रोकथाम में धार्मिक नेताओं की भूमिका को भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। देशभर में तीन लाख से अधिक धार्मिक गुरुओं को इस अभियान से जोड़ा गया है, जो यह स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि बाल विवाह गैरकानूनी है और किसी भी धर्म में इसकी अनुमति नहीं है। प्रतापगढ़ जिले में भी अनेक धार्मिक स्थलों पर यह संदेश प्रदर्शित किया गया है कि इस परिसर में बाल विवाह स्वीकार्य नहीं है।
केंद्र सरकार के ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के अंतर्गत, जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर गायत्री सेवा संस्थान द्वारा टेंट संचालकों, बैंड वालों, दर्जियों, कैटरर्स एवं विवाह समारोहों से जुड़े अन्य सेवा प्रदाताओं के साथ बैठकें कर उन्हें जागरूक किया जा रहा है कि बाल विवाह में किसी भी प्रकार की सहभागिता कानूनन अपराध है।
