पवित्र साधना से जीवन में निश्चित रूप से प्रसन्नता बढ़ती है : आचार्य विजयराज
उदयपुर, 4 अगस्त। केशवनगर स्थित अरिहंत वाटिका में आत्मोदय वर्षावास के तहत रविवार को हुक्मगच्छाधिपति आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. एवं उपाध्याय श्री जितेश मुनि जी म.सा. की निश्रा में सप्तभय निवारक साधना सामूहिक रूप से की गई। श्रीसंघ अध्यक्ष इंदर सिंह मेहता ने बताया कि सात भय इहलोक भय, परलोक भय, आदाण भय, अकस्मात भय, आजीविका भय, मरण भय व अपयश भय के तहत रविवार को सप्तभय निवारक नयनाभिराम साधना में 1500 सजोड़े एवं एकल श्रद्धालुओं ने जाप किया। प्रातः 9 बजे उपाध्याय श्री जितेश मुनि जी म.सा. व विद्वान श्री विनोद मुनि जी म.सा. ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को सविधि णमोत्थुणं का डेढ़ घंटे तक अविरल जाप कराया। तत्पश्चात धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने फरमाया कि भय निवारण की साधना जीवन में शान्ति का आधार है। एक साथ मिलकर बार-बार उन्हीं शब्दों का विधि सहित उच्चारण करने से, आवर्तन करने से मनुष्य का जीवन चार्ज हो जाता है, जैसे चार्जर द्वारा मोबाइल चार्ज किया जाता है। यह साधना की उपासना पद्धति है। इस पद्धति से जब व्यक्ति निरन्तर जीने लगता है तो जीवन में पवित्रता की अभिवृद्धि होती है। यह जीवन के रिएक्शन, एक्शन एवं डायरेक्शन को बदल देती है। साधना से पवित्रता का सृजन होता है, इससे जीवन में निश्चित रूप से प्रसन्नता बढ़ती है। आगमों में बताया गया है कि तीर्थंकर के केवलज्ञान प्राप्त करने पर सम्यकृदृष्टि 64 इन्द्र णमोत्थुणं के द्वारा उनकी स्तुति व गुणकीर्तन करते हैं। मनोविज्ञान कहता है कि व्यक्ति जैसा-जैसा चिंतन करता है वैसा-वैसा घटित होता जाता है। अतः अच्छे भावों के साथ इस प्रकार की आराधनाएं करें क्योंकि इनसे कष्टों का निवारण होता है, मन-स्वभाव व क्रिया में सकारात्मक परिवर्तन आता है। संघ मंत्री पुष्पेन्द्र बड़ाला ने बताया कि जाप में भाग लेने वाले सभी श्रद्धालुओं को स्व. मीठालाल-शान्ति देवी हरकावत की स्मृति में नरपत-निर्मला हरकावत परिवार की ओर से मिल्टन की वाटर बोटल प्रभावना स्वरूप वितरित की गई। जाप के पश्चात 21 लक्की ड्रा भी निकाले गए। मीडिया प्रभारी डॉ. हंसा हिंगड़ ने बताया कि दोपहर में तीन दिवसीय स्वाध्यायी शिविर का समापन हुआ। समारोह की अध्यक्षता इंदर सिंह मेहता ने की जबकि मुख्य अतिथि संघ संरक्षक हेमन्त कोठारी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में संघ संरक्षक जवरीलाल बोहरा उपस्थित थे। सभी स्वाध्यायियों को उदयपुर श्रीसंघ द्वारा चांदी के सिक्के उपहार स्वरूप भेंट किए गए। सह मंत्री ललित बम्ब ने बताया कि जाप अनुष्ठान में स्थानीय जन के अतिरिक्त चैन्नई, खरियार रोड़, पूना, जयपुर, भीलवाड़ा, खेरोदा, भदेसर, आवरी माता, चिकारड़ा, बानसेन, बोहेड़ा आदि क्षेत्रों से श्रद्धालु उदयपुर पधारे, जिनके आवास-निवास की समुचित व्यवस्था श्रीसंघ द्वारा की गई। स्वाध्याय परिषद के प्रभारी अशोक पोखरना ने उदयपुर श्रीसंघ द्वारा की गई सुंदर व्यवस्था के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
1500 श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से की सप्तभय निवारक साधना, समवेत स्वरों से गूंज उठा पांडाल
