सीसारमा नदी व मदार नहर में नहीं हो कचरा व  गंदगी विसर्जन

उदयपुर ,14 दिसंबर ।   रविवार को आयोजित “झील संवाद” में  सीसारमा नदी तथा मदार नहर में प्लास्टिक , पॉलीथिन व  अन्य घरेलू कचरे के  पंहुचने पर    गंभीर  चिंता व्यक्त की गई।
 झील संरक्षण समिति से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि सीसारमा नदी एवं मदार नहर उदयपुर झील प्रणाली की प्रमुख जल प्रवाह व्यवस्थाएं   हैं। इनके किनारों व  भीतर कचरे, गंदगी का  विसर्जन   उदयपुर के  जल तंत्र को विषैला बना देगा।
झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य   तेज शंकर पालीवाल ने कहा  कि    प्लास्टिक और पॉलीथिन कचरे  में  रोगजनक  जीवाणु पाए जाते हैं । झीलों, नदी नालों में   ऐसे रोगकारक  तत्वों का निरंतर संचय जल जनित बीमारियों को बढ़ा देगा।
सामाजिक कार्यकर्ता नंद किशोर शर्मा ने कहा  कि  कचरे व गंदगी विसर्जन पर नियंत्रण नहीं हुआ तो जन स्वास्थ्य तो बिगड़ेगा ही , सम्पूर्ण  पर्यटन व्यवसाय  भी संकट में पड़ जाएगा ।
एक्शन फॉर फ़ूड प्रोग्राम के पूर्व निदेशक पल्लब दत्ता ने  बताया कि    माइक्रोप्लास्टिक जलीय जीवों के लिए खतरनाक है।   खाद्य श्रृंखला के माध्यम से यह  हम  मनुष्यों के शरीर में भी  पहुंच  जाता है ।
 वरिष्ठ नागरिक द्रुपद सिंह ने  कहा कि यदि  प्रमुख जल प्रवाह मार्ग स्वच्छ नहीं रहेंगे, तो उदयपुर  “ गंदी झीलों का  शहर ” बन कर रह जायेगा ।
By Udaipurviews

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