– पर्युषण के सातवें दिन उत्तम तप धर्म मनाया
– संसार में गुरु से बढ़ कर कोई नही है : आचार्य कुशाग्रनंदी
उदयपुर, 6 सितम्बर। पायड़ा स्थित पद्मप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में देवश्रमण आचार्य कुशाग्रनंदी महाराज, मुनि अजयदेव व भट्टारक देवेंद्र विजय, ब्रम्हचारिणी आराधना दीदी व अमृता दीदी संघ के सानिध्य में सकल दिगम्बर जैन समाज पायड़ा में दशलक्षण पर्व के सातवे दिन उत्तम तप दिवस मनाया गया। प्रचार संयोजक संजय गुडलिया, दीपक चिबोडिया ने बताया कि उत्तम सोच धर्म के अवसर पर सौधर्म इन्द्र सुरेश कुमार बारणोट की ओर से सफेद चंदन के लेपन से हुई पद्मप्रभु भगवान की शांतिधारा हुई। सभी क्रिया के बाद जल, दूध इक्षु रस, नारियल, रस, दही, सर्व ओशोधी चंदन, पुष्पवर्षा, पूर्ण कलश एवम दूध से की गई ।
प्रवक्ता प्रवीण सकरावत ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान रमेशचन्द्र चिबोडिय़ा व सुशीला देवी चिबोडिय़ा के 32 उपवास, ब्रम्हचारिणी आराधना दीदी के 16 उपवास इसके अलावा 10 उपवास, 5 उपवास भी श्रावक-श्राविकाओं द्वारा किए जा रहे है। उपवास वाले श्रावक-श्राविकाओं को उद्यापन हेतु गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा के रूप में मंदिर लाए गए। जहां पद्मप्रभु भगवान की पूजना-अर्चना करने के बाद पारणा कराया गया।
चातुर्मास समिति अध्यक्ष धनराज सकावत ने बताया कि जीवन में रोगों के नाश हेतु 108 कलशों का अभिषेक अतिशय कारी पद्मप्रभु भगवान पर महामस्तकाभिषेक किया गया। आज प्रभु के मस्तक पर जैसे जैसे दूध की शांतिधारा होती गई, वैसे-वैसे प्रभु का मुख चमकने लगा। कामधेनु प्रभु पर अभिषेक करनें की होड़ सभी श्रावक-श्राविकाओं में लगी रही। आज हुई उत्तम तप धर्म की विशेष पूजा और वनस्पतिक काय से ले कर बड़े से बड़ा जीव सभी की रक्षा करनें के अरग्य चढ़ाये गये। इस दौरान आयोजित धर्मसभा में आचार्य कुशाग्रनंदी महाराज ने कहा कि गुरु ज्ञान की वो अनुपम निधि है जिसके माध्यम से मनुष्य का चहुंमुखी विकास होता है और उसी के माध्यम से हमे हमारे मन के भावों में संस्कारों का बीजारोपण होता है। उन्होंने कहां कि ज्ञान मनुष्य को विनयशाली बनाता है परंतु भौतिकवादी इस युग में ज्ञान का जिस तरह बाजारीकरण हो रहा है वो भावी पीढ़ी के लिए सुखद संकेत नही है हमे अपनी नव पीढ़ी को किताबी ज्ञान के साथ साथ धर्म का ज्ञान भी देना होगा ताकि वह अपने धर्म के मार्ग से विमुख ना हो। संसार में गुरु से बढ़ कर कोई नही है ओर इसका आदर सम्मान हमारा नैतिक दायित्व है। आज मनुष्य मन के विकारो से इस कदर फँस चुका है कि वह चाह कर भी सदकर्माे को नहीं अपना पा रहा है ऐसे में विधान न केवल मन के विकारों को दूर करते है, अपितु मन में अच्छे भावों का भी संचार करते है। इस अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज पायड़ा, आयड़ व केशवनगर के धर्म प्रेमी महिला-पुरूष आदि उपस्थित थे।
