उदयपुर, 23 सितंबर। राजीव गांधी जल संचय योजना-द्वितीय चरण की जिला स्तरीय समिति की बैठक शुक्रवार को जिला कलक्टर ताराचन्द मीणा की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
जिला कलक्टर ने बताया कि जिले में कुल 11 ब्लॉक में 166 गावों में कुल 77466 हैक्टेयर क्षेत्रफल में राजीव गांधी जल संचय योजना द्वितीय चरण अन्तर्गत जल संग्रहण एवं संरक्षण के कार्य यथा एनीकट, एमपीटी, डीप सीसीटी, डब्ल्यूएचएस, चौकडेम, फार्म पोैण्ड, ट्रेन्च, चारागाह विकास, मेड़बंदी, पाइपलाइन, ड्रीप फव्वारा, पीजोमीटर, जल संग्रहण ढाचों की मरम्मत एवं पुनरुद्धार/जीर्णोद्धार आदि कार्य करावाये जाएंगे। इस योजना अन्तर्गत जलग्रहण विकास विभाग, वन विभाग, कृषि एवं उद्यानिकी, पीएचईडी, जल संसाधन, आरडीपीआर एवं भू जल विभाग द्वारा कार्य राज्य सरकार द्वारा निर्धारित टाईम लाईन अनुसार करवाये जायेगे। इस योजनान्तर्गत कुल 11 ब्लॉक मे 166 गांवों का जिला स्तरीय समिति द्वारा सर्वसम्मति से अनुमोदन किया गया।
जिला कलक्टर ने प्रथम चरण के बकाया समस्त कार्य पूर्णता प्रमाण को एक माह मे पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिये। साथ ही पीएमकेएसवाई योजना के अन्तर्गत कृषि एवं उद्यानिकी विभाग से विभागीय योजना मे लाभान्वित होने से शेष काश्तकारों की गतिविधि वार सूची एवं बजट जलग्रहण विकास विभाग को अवगत कराने के निर्देश दिये।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंयक मनीष ने कहा कि सभी लाइन विभाग दी गई गाइडलाइन के अनुसार अधिक से अधिक एवं प्रभावी कार्य योजना बनाने हेतु प्री सर्वे एवं नये कार्याे का जियोटेगिंग करते हुये प्राचीन बावड़ी, कुण्ड आदि के जीर्णाेद्धार कार्य भी लिये जावे। कार्य योजना मे कुल डीपीआर का 30 प्रतिशत कार्य मनरेगा अन्तर्गत प्रस्तावित किये जावें।
बैठक में जलग्रहण विकास विभाग के अधीक्षण अभियन्ता अतुल जैन ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 योजनान्तर्गत पुर्व स्वीकृत 9 ब्लॉक क्रमशः भीण्डर, जयसमंद, झल्लारा, कोटडा, कुराबड़, नयागांव, रिषभदेव, सलुम्बर, वल्लभनगर के178 गांवों को राज्य सरकार के निर्देशानुसार इस योजना अन्तर्गत लिया गया। बैठक में योजना के दिशा-निर्देशों, योजना के उद्देश्य, कार्य योजना तैयार करना, मॉनिटरिंग, लाईन विभागों का दायित्व, योजना में वित्त की व्यवस्था आदि की विस्तृत जानकारी दी। बैठक मे वन विभाग, जल संसाधन, भू जल विभाग, कृषि, उद्यानिकी, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, पीएचईडी एवं जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
द्वितीय चरण अन्तर्गत 166 गांवों का जिला स्तरीय समिति द्वारा किया गया अनुमोदन
