त्रिवेणी संस्था के सुनिल मित्तल द्वारा निर्देशित नाटक अरे शरीफ लोग की समीक्षा

शानदार जानदार अभिनय ने हंसाया गुदगुदाया और ठहाके लगवाए
त्रिवेणी संस्था ने रंगमंच को दिए नए आयाम
मेवाड़ में नाटकों का नया दौर प्रारंभ फतहनगर एवं अन्य शहरों में शीघ्र ही होंगे अनेक मंचन
अग्रवाल वैष्णव पंचायत एवं सुनील मित्तल ने रंगमंच के बिखरे मोतियों को एक माला में पिरोया
उदयपुर, 1 अक्टूबर। सोशल मीडिया, यूट्यूब पर नाटक अरे शरीफ लोग के लांच होते ही धूम मचा रहा है। पिछले दिनों उदयपुर के रंगमंच के इतिहास ने एक नई करवट ली एक नया दौर प्रारंभ हुआ। 1972 से 1999 के दशकों में त्रिवेणी नाट्य संस्था ने एक मजबूत और सार्थक पहल करते हुए बहुआयामी रंगमंच के उस दौर में जन-जन में नाटक को लोकप्रिय किया क्योंकि तब मनोरंजन के लिए एक सर्वाधिक पसंदीदा, पसंद आने वाला लोकप्रिय माध्यम था न केवल उदयपुर या राजस्थान वरन् देशभर के अनेक प्रसिद्ध शहर और थियेटरों में संस्था द्वारा अनेक नाटकों का मंचन कर त्रिवेणी का सर्वाेच्च शिखर को स्थापित किया।
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली (एनएसडी) के इब्राहिम अल्काजी, बीवी कारंत, ओम पुरी, ओम शिव पुरी, सुधा शिव पुरी, शुलभा देशपांडे, रोहिणी हटंगडी, मुंशी प्रेमचंद के पुत्र गुलाब राय तथा राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष स्व.मंगल सक्सेना जैसे प्रतिष्ठित भारतीय रंगमंच, साहित्य एवं हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के  व्यक्तियों ने इस संस्थान को परवान चढ़ाने में अपना सहयोग दिया। इस संस्था के सदस्य स्व. अफ़सर हुसैन, स्व. महेश नायक एवं अशोक बाँठिया ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली (देक)से पास आउट कर भारतीय रंगमच एवं हिंदी फ़िल्म इंडट्रय में अपनी धाक जमाई।
इसके अलावा स्वर्गीय राकेश नायक अरमोहेंद्र सिंह पुरी, गुरविंदर सिंह पुरी, दिलीप नायक, डॉ.  सुरेश अग्रवाल, डॉ. गिरीश वर्मा, डॉक्टर सीके, राजू वर्मा, सुनील मित्तल, दिनेश तायल, डॉक्टर प्रेम जाने, डॉ. ललित, पारुल ढोलकिया, नीलम कावड़िया, डॉ. कल्पना, रमेश सनाढ्य, अंशु कोठारी, आभा भटनागर, वंदना अग्रवाल, अशोक जैन, नारायण अग्रवाल, उषा गुप्ता, भवदत्त मेहता, अनिल मेहता, हेमंत मित्तल, अनिल सिंगल, जाहिद हुसैन, डीडी शर्मा सुमन पामेचा, रवी भट्ट राधा रमन एवं सुनील टांक जैसे अनेक मंजे हुए रंग कर्मियों ने अपने उत्कृष्ट अभिनय से इसे जन-जन में लोकप्रिय बनाया संस्था ने देश भर में अनेक सफल नाटकों का मंचन किया।
त्रिवेणी के सदस्य एवं मीडिया प्रबंधक नारायण अग्रवाल ने बताया कि अभी हाल ही सितंबर के आखिरी सप्ताह में अग्रवाल वैष्णव समाज एवं त्रिवेणी के निर्देशक श्री सुनील मित्तल के सराहनीय प्रयास से नाटक अरे शरीफ लोग का सफल मंचन किया गया। इस नाटक  के कलाकारों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया वे लगातार ठहाके लगाते ही रहे इस नाटक की सफलता से अभिभूत होकर संस्था एवं समाज ऐसे अनेक शो आयोजित करना चाहते हैं जो भविष्य में नजर आएंगे नारायण अग्रवाल के अनुसार रंगमंच की अंतर्निहित ऊर्जा और शक्ति से समाज को और व्यक्ति को एक नई ताकत और समझ मिलती है। अवसाद में गिरे तथा अकेलेपन से जूझ रहे व्यक्ति को समाज के साथ जोड़कर उपयोगी बनाने का साहस उत्पन्न करती है। इस प्रकार से नाटक न केवल मनोरंजन या उद्देश्य परक ही ना होकर व्यक्ति के जीवन को संवारने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
इस बात की खुशी है अब नाटकों का एक नया दौर शुरू हो रहा है। 23 और 25 सितंबर को अग्रसेन भवन प्रेक्षागृह सूरजपोल में नाटक अरे शरीफ लोग का मंचन किया गया। इस नाटक के लेखक श्री जयंत दल्वी तथा अनुवादक डॉ विजय बापट है। इस नाटक का निर्देशन त्रिवेणी नाट्य संस्था के संस्थापक महामंत्री एवं प्रख्यात रंगकर्मी श्री सुनील मित्तल ने किया। इनका सहयोग श्री सुनील टॉक और डॉक्टर हेमंत मित्तल ने बतौर सहायक निर्देशक कार्य किया। इस नाटक का कथानक यूं है कि अधेड़ उम्र की ताका झांकी वाली मानसिकता के बीच में चाल में रहने वाले चार बुजुर्ग अपनी इस मानसिकता की वजह से अपनी पत्नियो से प्रताड़ित होते रहते हैं क्योंकि वे दिन रात उनकी चौकीदारी में लगी रहती है। उस पर पुट यह कि उन्हीं का एक शरारती बच्चा अपनी खुराफातो से उन बुजुर्गों को कठिनाइयों व ज़िल्लत में डाल देता है जिससे परिस्थिति जन्य हास्य उत्पन होता है। नाटक के निर्देशक ने इस कथानक को पूरी तरह से मंच के ऊपर अपने पात्रों से जीवंत किया है। इस चाल में जिसका नाम है सज्जन विला उसमें एक काल्पनिक पात्र पुतली के रूप में आकर इस घटना का वर्णन करती है। निदेशक ने इस पुतली का बखूबी और प्रभावी तौर पर इस्तेमाल किया है। जितने भी पात्रों ने इस नाटक में भाग लिया उन्होंने अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है और अपने करैक्टर को बहुत ही सुंदर ढंग से जीवन्त किया है, विशेषकर डॉक्टर की भूमिका में निकुंज गोयल व पंडित की भूमिका में डॉ सुरेश अग्रवाल तथा गोपी की भूमिका में श्रीमती अनुराधा गुप्ता ने अपने अभिनय से दर्शकों को हंसा हंसा कर लोटपोट किया शेष कलाकारों मंदाकिनी, ज्योति, शानू, विनोद, विनीत, सुषमा, रमा और हेमंत मित्तल ने अपने अभिनय से दर्शकों को गुदगुदाया।
नाटक के निर्देशक की तारीफ इसी बात में है की संपूर्ण नाटक के दौरान सभी दर्शक न केवल गुदगुदाते रहे बल्कि खुल के ठहाके लगाए दर्शकों का यह मत था एक लंबे समय बाद उन्होंने इतना खूबसूरत हास्य नाटक देखा। जहां तक ध्वनि प्रभाव की बात है दीपक बंसल ने अनुकूल संगीत, ध्वनि प्रभाव दिए वही दिनेश तायल ने प्रकाश प्रभाव का असर प्रभावी प्रभाव से दीया सुनील टांक और हेमंत मित्तल की प्रभावी मंच परीकल्पना और मंच संयोजन ने मंचन और खूबसूरत दर्शिनिय बनाया, कुल मिलाकर निर्देशक और सहायक निर्देशक की टीम ने नए कलाकारों के साथ इस तरह से कार्य किया की वे कलाकार नए हैं ऐसा कहीं लगा ही नहीं। काफी अर्से बाद झीलों की नगरी में एक सशक्त प्रस्तुति देखने को मिली इसके लिए निर्देशक सुनील मित्तल एवं अग्रवाल समाज बधाई का पात्र है।

By Udaipurviews

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