प्रतापगढ़, 7 सितम्बर। वरिष्ठ शासन उप सचिव गृह विभाग जयपुर के आदेषो की पालना में प्रतिरोध और आंदोलन के लिए जिला कलेक्ट्रेट परिसर प्रतापगढ़ के पूर्व दिशा में एवं धरियावद रोड़ के दक्षिण दिशा में 150 गुणा 500 फीट राजकीय रिक्त भूमि उपलब्ध है।
अतिरिक्त जिला कलक्टर गोपाललाल स्वर्णकार ने जारी आदेष में बताया कि इस जगह पर प्रतिरोध एवं आंदोलन के लिए काफी संख्या में व्यक्ति एकत्रित हो सकते है व इस स्थल पर यातायात की दृष्टि से बाधा उत्पन्न नही होती है। उन्होंने बताया कि धरणा प्रदर्शन/आंदोलन के लिए इस जगह का चिन्हित किया गया है।
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आपसी समन्वय के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में गांधी फिल्म का प्रसारण करवाएं-जिला कलक्टर
प्रतापगढ़, 7 सितम्बर। आजादी के अमृत महोत्सव के आयोजन की श्रृखंला में जिले में 5 सितम्बर से 11 सितम्बर, 2022 तक ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर विद्यार्थियों के लिए गांधी फिल्म का प्रदर्शन किया जा रहा है।
जिला कलक्टर सौरभ स्वामी ने आदेष जारी कर बताया कि इसके लिए ब्लॉक एवं पंचायत स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग द्वारा स्थापित राजीव गांधी सेवा केन्द्रों, वीडियो वॉल्स, विद्यालयों/ महाविद्यालयों अन्य शिक्षण संस्थानों में उपलब्ध स्मार्ट क्लास रूम एवं वीडियों कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से गांधी फिल्म का प्रसारण किए जाने के निर्देश दिए गए है।
उन्होंने जिला परिषद के मुख्यकार्यकारी अधिकारी, मुख्य जिला षिक्षा अधिकारी, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के संयुक्त निदेषक, राजकीय स्नाकोत्तर महाविद्यालय प्रतापगढ़ के प्रचार्य, समस्त उपखण्ड अधिकारी व विकास अधिकारी को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में गांधी फिल्म का प्रदर्शन करवाने व फिल्म के प्रदर्शन के उपरान्त प्रगति रिपोर्ट व आवष्यक जानकारी बिन्दुवार तैयार कर संबंधित को भिजवाने के निर्देष दिए है।
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अपने नेत्रों को जीवित रहने दें, नेत्रदान करें- डाॅ कच्छावा
-37वां राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाडा
प्रतापगढ़, 7 सितम्बर। राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा के तहत लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक किया जा रहा है। 25 अगस्त से शुरू हुआ पखवाड़ा 8 सितंबर तक चलेगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी (अंधता) डा. राधेश्याम कच्छावा ने इस मौके पर आमजन से अपील करते हुए कहा कि नेत्रदान कर किसी की जिंदगी को रोशन करें और नेत्रों को जीवित रहने दें। क्योंकि नेत्रदान के बाद किसी नेत्रहीन व्यक्ति की जिंदगी में रंग से उजाला भर देंगे।
इस मौके पर जिला चिकित्सालय प्रतापगढ़ में नेत्रदान पखवाड़ा पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित किया गया। जिसमें नेत्रदान से जुड़ी गोमाबाई जैसी संस्था के चिकित्सक और पदाधिकारी भी सरीख हुए। इस मौके पर नेत्रदान से जुड़े तमाम विषय विशेषज्ञों ने अपने अपने मत और नेत्रदान के विषय में जानकारी दी।
एक दिवसीय कार्यशाला में जिला चिकित्सालय नेत्र रोग प्रशिक्षु डाॅ प्रीति मिश्रा ने बताया कि हर साल लोग नेत्रदान कर रहे हैं, लेकिन जरूरत के हिसाब से दान में मिलने वाले नेत्र की संख्या कम है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को नेत्रदान के लिए आगे आकर अपने आसपास के लोगों को भी प्रेरित करना चाहिए। नेत्रदान पखवाड़े का मूल उद्देश्य भी यही है।
उन्होंने बताया कि विकासशील देशों में दृष्टिहीनता, स्वास्थ्य समस्याओं में एक बड़ी समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कॉर्निया की बीमारी (कॉर्निया जो आंखों की अगली परत होती है), मोतियाबिंद और ग्लूकोमा के बाद होने वाली दृष्टि हानि के प्रमुख कारणों में से एक है।
डा. मिश्रा ने बताया किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके विभिन्न अंगों को दान किया जा सकता है। उसे उन रोगियों में प्रत्यारोपित किया जा सकता है जिनको उसकी जरूरत है। मृत्यु के बाद नेत्रदान से क्षतिग्रस्त कॉर्निया की जगह पर स्वस्थ कॉर्निया को प्रत्यारोपित किया जाता है। प्रत्यारोपण के बाद दृष्टिहीन व्यक्ति फिर से देख सकता है। उसकी जिंदगी रोशन हो सकती है।
अंधता कार्यक्रम के जिला को-आर्डिनेटर महेश पादीदार ने बताया कि नेत्रदान मृत्यु के छह घंटे के अंदर हो जाना चाहिए। नेत्रदान की सुविधा घर पर भी दी जाती है। यदि किसी व्यक्ति ने नेत्रदान की घोषणा न की हो, उसके रिश्तेदार मृत व्यक्ति का नेत्रदान कर सकते हैं। नेत्र आपरेशन के बाद व चश्मा पहनने वाले भी नेत्रदान कर सकते हैं।
इसी क्रम में गोमाबाई नेत्र चिकित्सालय की डा. सस्मिता संघई ने बताया राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के अंतर्गत लोगों को नेत्रदान करने के लिए उनकी संस्था द्वारा किए जा रहें कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गोमाबाई संस्था की ओर से नेत्रदान और नेत्ररोग के विषय में लगातार आमजन को जागरूक कर नेत्रदान से जुड़ी तमाम भ्रंातियों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी देकर उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है। उन्होंने बताया यदि कोई व्यक्ति नेत्रदान के लिए इच्छुक है तो वह संपर्क कर सकते हैं।
