उदयपुर, 1 सितम्बर । पायड़ा स्थित पद्मप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में देवश्रमण आचार्य कुशाग्रनंदी महाराज, मुनि अजयदेव व भट्टारक देवेंद्र विजय, ब्रम्हचारिणी आराधना दीदी व अमृता दीदी संघ के सानिध्य में सकल दिगम्बर जैन समाज पायड़ा में दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन पद्मप्रभु भगवान की प्रतिमा पर जलाभिषेक के साथ महाशांति धारा की गई। प्रचार संयोजक संजय गुडलिया, दीपक चिबोडिया ने बताया कि उत्तम मर्दव धर्म के अवसर पर प्रभु का अभिषेक प्रात: सवा सात बजे प्रारम्भ हुआ। सभी क्रिया के बाद जल, दूध इक्षु रस, नारियल, रस, दही, सर्व ओशोधी चंदन, पुष्पवर्षा, पूर्ण कलश एवम दूध से की गई ।
प्रवक्ता प्रवीण सकरावत ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान रमेशचन्द्र चिबोडिय़ा व सुशीला देवी चिबोडिय़ा के 32 उपवास, ब्रम्हचारिणी आराधना दीदी के 16 उपवास इसके अलावा 10 उपवास, 5 उपवास भी श्रावक-श्राविकाओं द्वारा किए जा रहे है। सुबह दिन में आचार्य के सानिध्य में तत्ववार्थसूत्र विषय पर पाठाशाला का आयोजन किया जा रहा है। वहीं शाम को सांस्कृति कार्यक्रम एवं भव्य आरती का आयोजन हुआ।
इस दौरान आयोजित धर्मसभा में आचार्य कुशाग्रनंदी महाराज ने कहा कि इस पर्व में आत्मा के दस गुणों की आराधना की जाती हैं । इसका सीधा सम्बन्ध किसी व्यक्ति विशेष से न होकर आत्मा के गुणों से है। इन गुणों में से एक गुण की भी परिपूर्णता हो जाय तो मोक्ष तत्व की उपलब्धि होने में किंचित भी सदेंह नहीं रह जाता है। प्रत्येक समय हमारे द्वारा किये गये अच्छे या बुरे कार्यो से कर्म बन्ध होता है। जिसका फल हमें अवश्य भोगना पड़ता है। शुभ कर्म जीवन व आत्मा को उच्च स्थान तक तो ले जाता है। वहीं अशुभ कर्मों से हमारी आत्मा मलिन होती है।
