उदयपुर। नमो ड्रोन दीदी योजना ने महिला स्वयं सहायता समूहों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया है। इससे न केवल कृषि पद्धतियों में सुधार हुआ है बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हुई है।
राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया द्वारा नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत कृषि ड्रोनों का वितरण के संबध में पूछे गए अतारांकित प्रश्न पर कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने यह जानकारी दी। श्री ठाकुर ने बताया कि भारत सरकार ने महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने और उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 2023-24 से 2025-26-की अवधि के लिए 1261 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ नमो ड्रोन दीदी योजना को मंजूरी दी है। वर्ष 2023-24 में प्रमुख उर्वरक कंपनियों (एलएफसी) ने अपने आंतरिक संसाधनों से 1094 कृषि ड्रोन महिला स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध कराए गए। इनमें से 500 ड्रोन नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत वितरित किए गए। ड्रोन प्राप्त करने वाली महिलाओं को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा अधिकृत रिमोट पायलट प्रशिक्षण संगठनों (आरपीटीओएस) में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षित महिलाओं को ड्रोन संचालन के लिए प्राधिकृत लाइसेंस भी प्रदान किए गए। उन्होंने जानकारी दी कि जनवरी 2026 तक एलएफसी द्वारा वितरित किए गए ड्रोनों की संख्या 1094 रही। इसमें प्रमुख राज्यों में कर्नाटक (145), उत्तर प्रदेश (128), आंध्र प्रदेश (108), हरियाणा (102) और मध्य प्रदेश (89) शामिल हैं। एडीआरटीसी, बेंगलुरु द्वारा किए गए अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि ड्रोन उपलब्ध होने से एसएचजी की गतिविधियों में विविधता आई है तथा आधुनिक कृषि पद्धतियों के उपयोग से दक्षता और उत्पादकता में वृद्धि हुई है। ग्रामीण समुदायों में महिलाओं के लिए आय के नए अवसर सृजित हुए हैं।
नमो ड्रोन दीदी योजना ने महिला स्वयं सहायता समूहों की बदली तकदीर
